Environment Conversation
A Big Challenge | Environment Conservation
औद्योगिक क्रांति से जनता लाभ बहुत मिला। रोजगार में वृद्धि हुई। यातायात सरल हुआ। जीवन शैली सुलभ हुई।
लेकिन इसके हानिकारक परिणाम भी सामने आये। जिनका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मानव जीवन से सम्बंध है।
इंसान की स्वार्थी प्रवृति के कारण मनुष्य ने पर्यावरण दूषित करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। पेडों की अंधाधुँध कटाई की। निर्दोष की हत्या एवं शिकार किया। युद्ध के लिए परमाणु परीक्षण किए। आतंकवादियों को हथियार वितरित किये। फैक्ट्रियों से केमिकल और धुँआ से जल, वायु को दूषित किया। दूध इत्यादि खाने पीने की वस्तुओं में रसायनों की मिलावटखोरी की।
भौतिकवादी इंसान ने पर्यावरण को झकझोर कर रख दिया। प्रकृति का दम घुटने लगा था।
हालांकि विभिन्न समाज सेवी संस्थाओं, सरकारी संगठनों, NGOs, पर्यावरण प्रेमी/संरक्षकों ने इसके लिए प्रयास भी बहुत किये है। लेकिन परिणाम न के बराबर ही मिला। भारत सहित विश्व के विभिन्न संगठन/संगठन/कार्यक्रम पर्यावरण के संरक्षण को लेकर कार्यरत है जैसे- NCEPC, UNEP, WHO, FAQ, IPCC, UNFCCC, OECD, TERI, IUCN, WWF, Green Peace इत्यादि संस्थाए, सरकारी और गैर सरकारी संगठन पर्यावरण को बचाने के प्रयासरत है।
इनके इतने प्रयास के बावजूद भी पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा था।
लेकिन प्रकृति अपने आपको संतुलित करना जानती है और आज कोरोना इसी का परिणाम है।
सायद भविष्य में corona virus चला जाये लेकिन हमें इसके लिए हमेशा तैयार रहना होगा। इससे सबक लेना होगा तथा पर्यावरण की रक्षा करनी होगी।
एक तरफ तो इंसान भोतिवादी बनता जा रहा है, अर्थात स्वार्थी, लोभी, लालची, दुराचारी(वैश्यावृति), क्रोधी, अहंकारी बनता जा रहा जिससे स्वयं का ही नाश कर रहा है इस अनमोल मनुष्य जीवन को व्यर्थ बर्बाद कर रहा है।
दूसरी ओर हम देखते है कि एक Saint Rampal Ji Maharaj है जो विश्व को सदाचार का पाठ पढ़ा रहे है। काम, क्रोध, लोभ, अहंकार का नाश कर आपसी भाईचारे को बढ़ा रहे है। उनके अनुयायी तमाखू (tobacco) सेवन नहीं करते है, जीव हत्या नहीं करते है ना ही मांस(meat) खाते है। किसी भी अवसर पर पटाखे तथा अगरबत्ती नहीं जलाते है जो हानिकारक रसायनों से बने होते है। होली पर रंगों का ढोंग नहीं करते है, जिससे लाखों लीटर पानी बर्बाद होने से बच जाता है। रावण तथा होलिका दहन नहीं करते है। क्योंकि वे मन की बुराइयों को जलाने पर विश्वास करते है। नदियों को दूषित नहीं करते है। संत रामपाल जी महाराज के जितने गुण लिखों उतने ही कम है।
सात समुद्र की मसी करू, लेखनी करू बनिराय।
धरती का कागज करू, गुरु गुण लिखा न जाय।।
भविष्य में प्रकृति का कोई कहर न आये इसके लिए हमें Sant Rampal Ji के नियमों का अनुसरण करना होगा। जिससे एक स्वच्छ समाज का भी निर्माण होगा और स्वच्छ पर्यावरण (Clean Environment) भी बनेगा।
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Way of Living
औद्योगिक क्रांति से जनता लाभ बहुत मिला। रोजगार में वृद्धि हुई। यातायात सरल हुआ। जीवन शैली सुलभ हुई।
लेकिन इसके हानिकारक परिणाम भी सामने आये। जिनका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मानव जीवन से सम्बंध है।
इंसान की स्वार्थी प्रवृति के कारण मनुष्य ने पर्यावरण दूषित करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। पेडों की अंधाधुँध कटाई की। निर्दोष की हत्या एवं शिकार किया। युद्ध के लिए परमाणु परीक्षण किए। आतंकवादियों को हथियार वितरित किये। फैक्ट्रियों से केमिकल और धुँआ से जल, वायु को दूषित किया। दूध इत्यादि खाने पीने की वस्तुओं में रसायनों की मिलावटखोरी की।
भौतिकवादी इंसान ने पर्यावरण को झकझोर कर रख दिया। प्रकृति का दम घुटने लगा था।
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| Save Environment |
हालांकि विभिन्न समाज सेवी संस्थाओं, सरकारी संगठनों, NGOs, पर्यावरण प्रेमी/संरक्षकों ने इसके लिए प्रयास भी बहुत किये है। लेकिन परिणाम न के बराबर ही मिला। भारत सहित विश्व के विभिन्न संगठन/संगठन/कार्यक्रम पर्यावरण के संरक्षण को लेकर कार्यरत है जैसे- NCEPC, UNEP, WHO, FAQ, IPCC, UNFCCC, OECD, TERI, IUCN, WWF, Green Peace इत्यादि संस्थाए, सरकारी और गैर सरकारी संगठन पर्यावरण को बचाने के प्रयासरत है।
इनके इतने प्रयास के बावजूद भी पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा था।
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| Save Earth |
लेकिन प्रकृति अपने आपको संतुलित करना जानती है और आज कोरोना इसी का परिणाम है।
सायद भविष्य में corona virus चला जाये लेकिन हमें इसके लिए हमेशा तैयार रहना होगा। इससे सबक लेना होगा तथा पर्यावरण की रक्षा करनी होगी।
एक तरफ तो इंसान भोतिवादी बनता जा रहा है, अर्थात स्वार्थी, लोभी, लालची, दुराचारी(वैश्यावृति), क्रोधी, अहंकारी बनता जा रहा जिससे स्वयं का ही नाश कर रहा है इस अनमोल मनुष्य जीवन को व्यर्थ बर्बाद कर रहा है।
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| World Victorious Saint Rampal Ji |
दूसरी ओर हम देखते है कि एक Saint Rampal Ji Maharaj है जो विश्व को सदाचार का पाठ पढ़ा रहे है। काम, क्रोध, लोभ, अहंकार का नाश कर आपसी भाईचारे को बढ़ा रहे है। उनके अनुयायी तमाखू (tobacco) सेवन नहीं करते है, जीव हत्या नहीं करते है ना ही मांस(meat) खाते है। किसी भी अवसर पर पटाखे तथा अगरबत्ती नहीं जलाते है जो हानिकारक रसायनों से बने होते है। होली पर रंगों का ढोंग नहीं करते है, जिससे लाखों लीटर पानी बर्बाद होने से बच जाता है। रावण तथा होलिका दहन नहीं करते है। क्योंकि वे मन की बुराइयों को जलाने पर विश्वास करते है। नदियों को दूषित नहीं करते है। संत रामपाल जी महाराज के जितने गुण लिखों उतने ही कम है।
सात समुद्र की मसी करू, लेखनी करू बनिराय।
धरती का कागज करू, गुरु गुण लिखा न जाय।।
भविष्य में प्रकृति का कोई कहर न आये इसके लिए हमें Sant Rampal Ji के नियमों का अनुसरण करना होगा। जिससे एक स्वच्छ समाज का भी निर्माण होगा और स्वच्छ पर्यावरण (Clean Environment) भी बनेगा।
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| जीने की राह Way |
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Way of Living






Do your duty
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