Natural Disaster and Pandemic

Reason of Natural Disasters and Pandemics
अधिकतर चिंतकों के मन में सवाल आता है-
प्राकृतिक आपदा क्यों आती है?
क्यों आती है महामारियां?

Grief of Starvation

मौसम विभाग से हमें जानकारी मिली है कि आज दिनांक 20 मई, 2020 को कलकत्ता, भारत में अम्फान चक्रवाती तूफ़ान आने वाला है। तथा कोरोना महामारी में पूरी दुनियां में मौत का तांडव मचा रखा है। लेकिन क्या कभी हमने ये सोचा है कि ये प्राकृतिक आपदाएं तथा महामारियां क्यों आती है? ये कृत्रिम होती है क्या प्राकृतिक? तथा इनके समाधान क्या है?

कहते है आवश्यकता अविष्कार की जननी है। जैसे जैसे मनुष्य की लालसाएं बढ़ती गयी, उन्हें पूरी करने की कोसिस के चलते मनुष्य ने स्वयं को प्रकृति का राजा मान लिया। और प्रकृति के साथ अत्याचार करना शुरू कर दिया। दो चार अविष्कार क्या हो गये, मनुष्य स्वयं को भगवान मान बैठा। प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुँध दोहन किया, निर्दोष जीवों की हत्या कर माँस खाया, इतना ही नहीं राज प्राप्ति के लिए तथा स्वार्थ सिद्ध करने के लिए हत्या की, चोरी की, बलात्कार किया, भ्रष्टाचार किया। मनुष्य को मनुष्य नहीं समझा। जाति धर्म के नाम पर खून बहाये। निर्दोष लोगों के साथ अन्याय किया। भगवान के अस्तित्व को नकारा। नास्तिक हो गये। शास्त्रविरुद्ध व्यर्थ साधना की। सत्य को अस्वीकार कर पाखण्ड पूजाओं को महत्त्व दिया। लोगों को मूर्ख बनाया। ये सब उसके विनाश के कारण बने। क्योकि लालची मनुष्य कभी सुखी नहीं रह सकता।
Never Eat Meat | Heinous Sin

जब धरती पर पाप बढ़ जाता है तो प्रकृति भी अपना कहर बरसाती है।
इन आपदाओं से बचने के प्रयास तो बहुत किये लेकिन ज्यादा सफलता हाथ नहीं लगी।
और अब हाथ मलकर बैठ गये।

क्योकि जिस उद्देश्य के लिये मनुष्य जन्म मिला उसके विषय में तो जानकारी ही प्राप्त नहीं की।
मनुष्य जीवन पूर्ण परमात्मा की सद्भक्ति के लिये मिला है। ताकि इस भयँकर काल जाल से पार हो सके। क्योकि इस काल लोक में शांति है ही नहीं। यहाँ दो मिनट का पता नहीं कब क्या बिजली गिर जाये अर्थात पता नहीं कब क्या आपदा आ जाये/अनहोनी घट जाये।

यदि इस इस लोक में सुखी रहना है तो इस अनमोल मनुष्य जीवन का उद्देश्य को जानना होगा। मनुष्य जन्म का उद्देश्य है पूर्ण परमात्मा की सद्भक्ति करके काल जाल से पार होना। यदि शास्त्रविधि अनुसार पूर्ण परमात्मा की सच्ची भक्ति करे तो प्राकृतिक आपदाओं से बचा जा सकता है। क्योंकि पूर्ण परमात्मा समर्थ है वे जो चाहे सो कर दे।
पूर्ण परमात्मा की सद्भक्ति पूर्ण गुरु से ही प्राप्त हो सकती है। पूर्ण गुरु/सतगुरु की पहचान होती है कि जो सभी पवित्र सद्ग्रन्थों जैसे गीता क़ुरान वेद पुराण गुरुग्रंथसाहिब बाइबिल इत्यादि का ज्ञाता हो तथा इन सद्ग्रन्थों से प्रमाणित सद्भक्ति बताये।
True Guru Saint Rampal Ji

आज इस विश्व में केवल जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही पूर्ण गुरु अर्थात सतगुरु/समर्थ गुरु है। उनके वचन में शक्ति है। उनके पास सद्भक्ति है जिससे कैंसर एड्स जैसी लाइलाज बीमारियां भी ठीक हो जाती है। अधिक जानकारी के लिए पढ़े पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा तथा देखे साधना चेनल शाम 7:30 बजे। अब जल्द से जल्द ज्ञान समझकर नाम दीक्षा ले और अपने जीवन को सुखी व सफल बनाये।

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